फिज़ाओ मैं फैली आज सबा काम है ,.......ghazal,

फिज़ाओ मैं फैली आज सबा काम है
फिज़ाओ मैं फैली आज सबा काम है 


फिज़ाओ मैं फैली आज सबा काम है बादलो के आंसुओ मैं बहता गम है;
किस दोष देते  अपनी इस हालत का खुदा के दर पे की दुआ का असर काम है;
लोग पूछते है अक्सर मेरी बेबसी का हाल बयान किया करे अभी वक़्त काम है;
दर्द इतना है के लफ्जो से बयान न हो हाथ मैं कलम है पर सियाही काम है;
आंसू रुकते नहीं रोकने से मेरे तड़प भड़ती गयी अब आंसू काम है;
ज़िन्दगी  वीरान है मंजिल सुनसान है घुटन भड़ने से मेरी साँसे काम है;

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