दास्ताँ ऐ मोह्हबत की कहानिया कहा होती है,,,,,,,,,,,,,,,,,,ghazal,

दास्ताँ ऐ मोह्हबत की कहानिया कहा होती है
दास्ताँ ऐ मोह्हबत की कहानिया कहा होती है


दास्ताँ ऐ मोह्हबत की कहानिया कहा होती है 
चाँद निकल आने पर नींदे कहा खोती है;
ये जो खेल मोह्हबत का कोई समझ न पाया परवाना जल जाने के बाद शमा कहा रोती है;आँगन सुना लगता है तन्हाई घेर लेती है उजड़े हुए बागो मैं बहारे कहा होती है;इंतज़ार ही इंतज़ार रह जाता है उम्र भर लौट आये वो ऐसी तवाकु कहा होती है;अहल ऐ जहां  मारी ठोकर दिलवालो को बदा पीने के बाद दास्तान अयान कहा होती है;बज़्म ऐ अहल ऐ हुनर अब कभी देखि नहीं जीत जहा दिल ऐ सुकून मिले ऐसी बज़्म कहा होती है;अहल ऐ जहाँ --दुनिया के लोग बदा --शराब बज़्म ऐ अहल ऐ हुनर --खुशहाल लोगो का जमावड़ा तवाकु --उम्मीद 

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ