जो ताबासूम खो गयी थी लौट आयी है umeed ,,,,,,,,,,,,,,,,ghazal,

जो ताबासूम खो गयी थी लौट आयी है
जो ताबासूम खो गयी थी लौट आयी है 


जो ताबासूम खो गयी थी लौट आयी है एक दोस्त की मुस्कान से लौट आयी है;
क़फ़न बाँदा है अब कोई भी तूफ़ान आये चल पड़े है यु खोई मंजिल लौट आयी है;
बे रूखी का आलम है तनहा रातो मैं जो रुस्वा थी हवा लौट आयी है;
बे ज़क ज़िन्दगी बे जान सी हुई उसको लगायी पुकार लौट आयी है;
कलम मेरी कई अल्फाज़ो को संभालती है धुंदली यादे ख्यालो मैं लौट आयी है;
भूझे हुए मछालो को चिंगारी दे जीत अंधेर घर मैं रौशनी लौट आयी है;

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