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| गुलिस्तां फूलो मैं अब खुशबु न रही |
गुलिस्तां फूलो मैं अब खुशबु न रही पहले वाली अब बज़म मैं बात न रही;
शायरी की जुबानी सब दिल ऐ हाल कहते है अब एसी किसी के साथ कोई मुलाक़ात न रही;
वाह वाह्यी करके हो जाते है परे किसी के अल्फाज़ो मैं वो बात न रही;
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