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| हालात इतने बिगड़े की अपनों से दूर हो गए |
हालात इतने बिगड़े की अपनों से दूर हो गए देखे सारे खुवाब चकना चूर हो गए;
ज़ुल्म के सताये लोग गुमराह हो चुके कई बागी हो गए कई साकी हो गए;
अरमान था दिल का नाम रोशन हो जाए किस्मत का खेल देखो दमन दागी गए;
आवाम की कोण सुनता मिटा देते है खाखी वाले भी इदहशत गर्दो गुलाम हो गए;
गरीब की किया औक़ात दौलत मन्दो के बिच मैं गम के आंसू पीने को यु लाचार हो गए;
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