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| अक्सर जिस रूहानी का मेरे ख्यालो मैं आना जाना है |
अक्सर जिस रूहानी का मेरे ख्यालो मैं आना जाना है ये दिल ऐ नादान समझता नहीं के वो अपना है या बेगाना है;
जिसे ढूंढ़ता रहा हूँ हर शहर ओ ग्राम मैं वो मिल जायेगा मुझे ये नक़्शे प् जाना पहचाना है;
किस क़दर वो मेरे रोम रोम मैं बस गया बताये कैसे के लाख जलजले आ जाये ज़िन्दगी मैं फिर भी उसे पाना है;
मोह्हबत बदनाम कहते है ये ज़माने को लोग सारे ये किया जाने नाम मोह्हबत खुदा का ये सबको बताना है;
बोहत तकलीफ होती है इश्क़ की राह ऐ मंजिल मैं अब चाहे नक़्श ऐ प् को आज मानना है;
कबूल कर ले ये पैगाम मेरा दिल ऐ हाल बयान हैतू न जाने मेरा दिल ऐ नादान तेरा ही दीवाना है;
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