रात कटती नहीं दिन गुजरता नहीं ,,,,,,,,,,,,,,,,ghazal


रात कटती नहीं दिन गुजरता नहीं
रात कटती नहीं दिन गुजरता नहीं


रात कटती नहीं दिन गुजरता नहीं ज़िन्दगी रुक जाती है वक़्त रुकता नहीं;
दर्द ऐ दिल हो तो आंखे नम हो जाती है फिर ज़माने से गम कोई छुपता नहीं;
तन्हाईया होने लगे जबभी मरे क़रीब तूफ़ान उदासियों का सीने फिर रुकता नहीं;
अहल ऐ जहां के ताने बोहोत चुभते है जो ज़ख़्म मिले उसका दर्द रुकता नहीं;

जाम पी लेते है जब भी वो याद आये तड़पाने वाला मंजर फिर रुकता नहीं;

वो गयी छोड़के एसा सदमा लगा जीत याद आये शब् ऐ फ़िराक दिल धड़कता नहीं;

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ