आज चमन मैं हर फूल खिलता हुआ है ,,,,ghazal,

आज चमन मैं हर फूल खिलता हुआ है
आज चमन मैं हर फूल खिलता हुआ है


आज चमन मैं हर फूल खिलता हुआ है ये कोण सा जहां हर शख्स हस्ता हुआ है;
कोयलिया भी गीत मधुर गुनगुनाने लगी इन फिज़ाओ का रुख भी बदलता हुआ है;
सबा का झोंका मीठी सी महक साथ लाया उस महक से मुरझा फूल संभालता हुआ है;
पंछी भी एक डोर मैं उड़ रहे आस्मां मैं हसरत ऐ परवाज़ को मन मचलता हुआ है;
बारिश की बुँदे चेहरे पर गिरने लगी टिप टिप एक अजीब सा सुकून दिल को मिलता हुआ है;
हुसन से भरपूर मेरे ख्यालो मैं बसा जीत तेरी जुल्फों का जाल रुखसार पर लटकता हुआ है;

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