तनहा सा सफर है मंजिल कहीं और,,,,,,,,,,,,Hindi Shayari, sad Shayari,

तनहा सा सफर है मंजिल कहीं और
तनहा सा सफर है मंजिल कहीं और


मेरे माझी मुझे ले चल किसी और तनहा सा सफर है मंजिल कहीं और;
क़फ़स ऐ घूम मैं एसे फंस्ये के मायूस मन था ख़ुशी किसी और;
चमन ऐ दिल का हाल न पूछो पतझड़ छाया है हरयाली कही और;
थक गया इंतज़ार कर कर के जिस्म नाशाद साँसे कही और;
चेहरे पे चेहरा बदलती रही शोहरत मिली पहचान कही और;
 हर गली सुनसान हर तरफ उदासी जो महफ़िल लगा ते वो महफ़िल कही और; न देख मेरी और इस तरह ज़ालिम तेरी जुबान झूठी अलफ़ाज़ कही और; 




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