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| राह ऐ मंजिल का पता था |
राह ऐ मंजिल का पता था दिल ये मेरा कभी दुखा न था;ज़िन्दगी बड़े सुकून से गुजारी जब तक मोह्हबत का पता न था;शान ओ शौकत से भरी थी ज़िन्दगी शीश किसे के आगे झुका न था;महफ़िल हुआ करती थी मेरी कभी यु मैं बभी कभी तनहा न था;किसी की तड़प न थी मेरे दिल को ख़ुशी से जिया दर्द लम्हा न था;
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