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| शमा हाथ मैं लिए सुलगते रहे हम |
तनहा सी ज़िन्दगी मैं अकेले रहे हम;मंजिल कोई नहीं भटकते रहे हम;अपने घर को रोशन करने की खातिर शमा हाथ मैं लिए सुलगते रहे हम;दर बा दर ठोकर खायी जहां की
मोह्हबत करने का सिला पाया जो
लोगो की नज़र मैं खटकते रहे हम;
मेरा रब ही जानता है कोण है फरेबी
ये सब भूला कर दुआ करते रहे हम;
बस एक हसी के लिए तड़पते रहे हम;
दिल ऐ नादान एक महफ़िल की चाह मैं
अरमानो की सूली पर लटकते रहे हम;
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