शमा हाथ मैं लिए सुलगते रहे हम,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,Hindi Shayari, sad Shayari,

शमा हाथ मैं लिए सुलगते रहे हम
शमा हाथ मैं लिए सुलगते रहे हम

तनहा सी ज़िन्दगी मैं अकेले रहे हम;
मंजिल कोई नहीं भटकते रहे हम;अपने घर को रोशन करने की खातिर शमा हाथ मैं लिए सुलगते रहे हम;दर बा दर ठोकर खायी जहां की  
मोह्हबत  करने का सिला पाया जो 
लोगो की नज़र मैं खटकते रहे हम;
मेरा रब ही जानता है कोण है फरेबी 
ये सब भूला कर दुआ करते रहे हम;
बस एक हसी के लिए तड़पते रहे हम; 
दिल ऐ नादान एक महफ़िल की चाह मैं 
अरमानो की सूली पर लटकते रहे हम;


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