वो मेरी ज़िन्दगी का गुनाह गार मिला है,,,,,,ghazal

वो मेरी ज़िन्दगी का गुनाह गार मिला है
वो मेरी ज़िन्दगी का गुनाह गार मिला है


वो मेरी ज़िन्दगी का गुनाह गार मिला है बस मेरा अक्स मेरा वफ़ा दार मिला है;
रूक गयी कश्ती मझधार मैं जाकर माझी के हाथ टूटा पटवार मिला है;
कभी न समझ पाए उसका हाल ऐ दिलवो शख्स किसी और का दावेदार मिला है;
इंसान पहचानने का हुनर नहीं था मुझमें जो भी गले लग मिले वो गदार मिला है;
मोह्हबत मैं कई हादसे हुए मेरे साथ वो संगदिल बे वफ़ा यार मिला है;
महफ़िल मैं न कह पाए अपनी दास्तान हर शख्स की नज़रो मैं अंगार मिला है;
तनहा जी ज़िन्दगी उसकी याद मैं जीत इस दिल को दर्दो का भार मिला है;

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