चाँद भी दीवाना रहा उसके हुसन को देख कर ,,ghazal


चाँद भी दीवाना रहा उसके हुसन को देख कर
चाँद भी दीवाना रहा उसके हुसन को देख कर
चाँद भी दीवाना रहा उसके हुसन को देख कर फूल भी खिल गए उसकी ताबासूम देख कर;
नज़रो ही नज़रो मैं हाल ऐ दिल बयान हुआ जुबान सील गयी उसकी मासूमियत को देख कर;
दिल निकलने लगा सीने से मेरे धड़कने भड़ने लगी एक एहसास सा जगा उसकी मासूमियत को देख कर;
मोह्हबत किया होती ये हम नहीं जानते थे होने लगी हमें भी उसके नखरे ओ अदा को देख कर;
उसकी बंदगी करू ये दिल एहसास हुआ है आज सजदे करने को जी किया उसमें रब को देख कर;
तनहा कब तक जीता जिंदगी को यूही जीत उमंग सी जागी है दिल मैं उसको देख कर;

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