चाँद भी दीवाना रहा उसके हुसन को देख कर फूल भी खिल गए उसकी ताबासूम देख कर;
नज़रो ही नज़रो मैं हाल ऐ दिल बयान हुआ जुबान सील गयी उसकी मासूमियत को देख कर;
दिल निकलने लगा सीने से मेरे धड़कने भड़ने लगी एक एहसास सा जगा उसकी मासूमियत को देख कर;
मोह्हबत किया होती ये हम नहीं जानते थे होने लगी हमें भी उसके नखरे ओ अदा को देख कर;
उसकी बंदगी करू ये दिल एहसास हुआ है आज सजदे करने को जी किया उसमें रब को देख कर;
तनहा कब तक जीता जिंदगी को यूही जीत उमंग सी जागी है दिल मैं उसको देख कर;

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