मेरी ज़िन्दगी ------ hindi shayari




ख़ास ओ खोशाक किया पल मैं मेरी ज़िन्दगी को;करना है मुक़दमा इश्क़ की कोई न अदालत है;
वादे किये हमसे निभाए किसी और के साथजाल साजिया न कर इसमें होती खजालत है;

खजालत '''''''शर्म की बात

ख़ास ओ खोशाक ----नष्ट कर दिया 



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