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| नजूमी देख रिश्तो की डोर काट से गयी है |
मेरे हाथो की लकीरे कियों मिट सी गयी है नजूमी देख रिश्तो की डोर काट से गयी है;
न जाने किस और तकदीर ले जा रही है दर्द ऐ दिल की ख़ुशी घट सी गयी है;
कोण जाने ये दिल ऐ नादान किया करे गमो को सँभालते धड़कन रुक गयी है;
दीदार ऐ यार की तम्मना थी दिल को पर इंतज़ार मैं ये साँसे रुक सी गयी है;
मेरा हाल भी मजनू जैसा हुआ लगता है तेरी उम्मीद मैं हस्ती लूट सी गयी है;
चाँद का दीदार करता रहा जीत रह गए किनारे कश्ती छूट गयी है;
नजूमी ----ज्योतिष

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