आजा फिर उसे मोड़ ते मैं करना यार-ऐ-दीदार,
![]() |
| आजा फिर उसे मोड़ ते मैं करना यार-ऐ-दीदार |
मेरे दिल दे मेहरमा एक वारी सुनले दिल दी पुकार आजा फिर उसे मोड़ ते मैं करना यार-ऐ-दीदार ;
किवे दसा तैनू हाल-ऐ-दिल अपना सनम तेरे आ जान नाल ज़िन्दगी च आयी बहार;
एक वरि आगे वधके फड़ले हाथ मेरा जान जाएँगी तू मेरे लई किना बेशुमार;
मैं तेरा हां तेरे लायी ही जीना है हूण कदी किसी मोड़ते सानू कराई न इंतज़ार;
ज़माना तो अक्सर दूरिया करा दीनदा है ज़माने तो न डर करदेवी इक़रार ,
उमरा तक याद करदा रहुगा एह जमाना हद तो वध करांगा तैनू सनम प्यार;

0 टिप्पणियाँ
Thank you so much but d, nt use spam comments