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| जो कर गए बदनाम पल मैं उनसे शिकवे कैसे करे |
जो कर गए बदनाम पल मैं उनसे शिकवे कैसे करे मेरी यही आरजू है की तुजे गुलिस्तां के रु बा रु करे;
अकेले बैठे दिल ही दिल मैं खुदा से बाते करते है कैसे ऐ बुलबुल ऐ बेताब तुझसे एक बार गुफ्तुगू करे;
अपनों ने तो जो भी था मेरे पास एक पल मैं छीन लिया अब जुबान ऐ गैर से कैसे शान ओ शौकत की आरजू करे;
तू भूला चुकी है सारे वादे जो हमने किये थे मैं भूल जाऊ वह पल कभी खुदा न करे;
मेरी घनघोर उदासी का साया चाँद को भी फीका कर गया जो सेह रहा हूँ मैं एसा को किसी संग फरेब न कैसे;
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