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| मैं तनहा नहीं हूँ दिल तन्हाई मैं अक्सर जीता है |
मैं तनहा नहीं हूँ दिल तन्हाई मैं अक्सर जीता है घुट घुट के दर्द ऐ जुदाई को अकेले युही सेह्ता है;
सेह लेता है जमाने की दी सारी तकलीफ भरी बाते चुप रहता है हमेशा जुबान से कुछ नहीं कहता है;
आह निकल ही जाती है जब तड़प भड़ती है दिन बा दिन गालो पर निशाँ आ जाते है जब आंसू बहते है;
ज़िन्दगी से चले गए मेरी न जाने किया खता हुई अब वो साथ तो नहीं पर खवाबो मैं अक्सर रहता है;
मेरे सीने मैं मारा खंजर कियों की बे वफाई उसने फिर भी माफ़ किया उसे जो दिल मैं धड़कता है;
फिज़ाओ मैं घूमता हूँ खोई हुई सबा की तलाश मैं ठोकरे ही खाता है जब भी राह मैं चलता है;
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