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| माँ तेरे हाथ की बनी चुरी याद आयी है |
माँ तेरे हाथ की बनी चुरी याद आयी है फिर जुबान पर वही प्यास लौट आयी है;.न तू है न तेरा साया है मेरे साथ युह हर रात मैंने रो कर हिज्र मैं बितायी है;.तेरी लोरी सुनकर नींद आजाया करती थी अब आँखों मैं आंसू की बरसात आयी है;
खियाल रखती थी मेरा जब बीमार होता था अब बे हाल हुए तो दिल से आह निकल आयी है;
मैं रुस्वा हु तुमसे ऐ दुनिया बनाने वाले लौटा दे मुझे मेरी खुशिया जो चुराई है;
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