बज् रही शेहनाई है----------dard shayari,

बज् रही शेहनाई है



बज् रही शेहनाई है


उनके घर मैं बज् रही शेहनाई है,
किसी और  के नाम की मेहंदी रचाई है,
बन चली  किसी और  की आँगन की तुलसी,
जिसके लिये अपनी सारी दुनिया लुटाई है,
रोशन ए ज़हा कर दिया किसी और  का,
यूह तो आग मेरे  ही घर को लग्गाई है ,
खुशिया कहा  दामन दर्दो से भारा,
अब तो चार-सू फैली मेरे तन्हाई  है,
छोड़  दिया उसने जब उस्की जरूरत थी,
राह ए मंजिल किसी और सँग निभाई है,
उसे अपना सम्झा गल्ती  उस्की नही ,
मझदार ए कष्ती  खुद  ही डुबाई  है,
दिया धोखा वो किया साथ  निभाती जीत  ,
जो वफा के नाम पर की बे-वफाई है,


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