गरम हवा जहरीला मौसम अक्सर ही तड़पता रहा .................dard shayari,

गरम हवा जहरीला मौसम अक्सर ही तड़पता रहा


गरम हवा जहरीला मौसम अक्सर ही तड़पता रहा
गरम हवा जहरीला मौसम अक्सर ही तड़पता रहा


गरम हवा जहरीला मौसम अक्सर ही तड़पता रहा क़फ़स ऐ तन्हाई मैं दिल खुद को ही रुलाता रहा;
किस किस को बताते अपनी दास्तान ऐ ज़िन्दगी हर कोई कुछ पल करीब रहकर फिर दूर जाता रहा;
कश्मकश एसी थी के किसको अपना रकीब समझते यहाँ हर मोड़ अहल ऐ जहां मुझको आजमाता रहा;
तन्हाइयो का खौफ दिन बा दिन भड़ता गया यूह इस कदर लाचार होकर मेरा साया दूर जाता रहा;
दिल तो था पर धड़कने बे वफ़ाई करने लगी संभालना मुश्किल था फिर दिल को समझाता रहा;
झूठी तब्बसुम लबो पर सजा कर जीत दिए ज़ख्मो को ज़माने से छुपाता रहा;



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