गरम हवा जहरीला मौसम अक्सर ही तड़पता रहा
| गरम हवा जहरीला मौसम अक्सर ही तड़पता रहा |
गरम हवा जहरीला मौसम अक्सर ही तड़पता रहा क़फ़स ऐ तन्हाई मैं दिल खुद को ही रुलाता रहा;
किस किस को बताते अपनी दास्तान ऐ ज़िन्दगी हर कोई कुछ पल करीब रहकर फिर दूर जाता रहा;
कश्मकश एसी थी के किसको अपना रकीब समझते यहाँ हर मोड़ अहल ऐ जहां मुझको आजमाता रहा;
तन्हाइयो का खौफ दिन बा दिन भड़ता गया यूह इस कदर लाचार होकर मेरा साया दूर जाता रहा;
दिल तो था पर धड़कने बे वफ़ाई करने लगी संभालना मुश्किल था फिर दिल को समझाता रहा;
झूठी तब्बसुम लबो पर सजा कर जीत दिए ज़ख्मो को ज़माने से छुपाता रहा;
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