शायद मेरी मुहब्बत मैं असर न था जो सुन न पायी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,2 line shayari

               शायद मेरी मुहब्बत मैं असर न था जो सुन न पायी





शायद मेरी मुहब्बत मैं असर न था जो सुन न पायी;
मैं उसकी  कबर ढूंढ़ती रही;और वह पुकारता रहा;




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