ठोकर ही मिलती रही सम्भलने वाला कोई नहीं,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,2 line shayari,

     ठोकर ही मिलती रही सम्भलने वाला कोई नहीं




भीड़ थी ज़माने की सुनने वाला कोई नहीं;
ठोकर ही मिलती रही सम्भलने वाला कोई नहीं;



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